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एक गांव के पास एक महात्माजी रहा करते थे। उनका स्वभाव बहुत ही शांत और सरल था। उनको क्रोध भी कभी नहीं आता था। एक बार कुछ दुष्ट स्वभाव के व्यक्तियों ने सोचा की चलो कुछ ऐसा किया जाए जिससे इन महात्माजी को क्रोध आ जाये और उनके सम्मान में कमी आ जाये। वे सब एक बार उनकी कुटिआ में गए और उन पर अनेकों निराधार आरोप लगाने लगे, लेकिन महात्माजी शांत रहे और उनकी बातों की उपेक्षा करते हुए उनका आतिथ्य भी करते नज़र आये। उनके व्यवहार से वे सब अत्यंत प्रभावित हुए और उनके ज्ञान और स्वभाव से शिक्षा और प्रेरणा प्राप्त कर अपने-अपने घर वापस गए।
By Vedanta Ashramएक गांव के पास एक महात्माजी रहा करते थे। उनका स्वभाव बहुत ही शांत और सरल था। उनको क्रोध भी कभी नहीं आता था। एक बार कुछ दुष्ट स्वभाव के व्यक्तियों ने सोचा की चलो कुछ ऐसा किया जाए जिससे इन महात्माजी को क्रोध आ जाये और उनके सम्मान में कमी आ जाये। वे सब एक बार उनकी कुटिआ में गए और उन पर अनेकों निराधार आरोप लगाने लगे, लेकिन महात्माजी शांत रहे और उनकी बातों की उपेक्षा करते हुए उनका आतिथ्य भी करते नज़र आये। उनके व्यवहार से वे सब अत्यंत प्रभावित हुए और उनके ज्ञान और स्वभाव से शिक्षा और प्रेरणा प्राप्त कर अपने-अपने घर वापस गए।