
Sign up to save your podcasts
Or


पू स्वामिनी पूर्णानन्द जी, स्वतंत्र सेनानी श्री गोपाल कृष्ण गोखले जी के जीवन का एक सुन्दर और प्रेरक प्रसंग सुना रही हैं। एक बार जब वे स्कूल में पढ़ते थे और उन सब को उनके शिक्षक ने कुछ होम-वर्क दिया। उनको जितना आता था उन्होंने लिखा, शेष अपने एक मित्र से पूछा और होम-वर्क पूरा कर दिया। शिक्षक उनके उत्तर से प्रसन्न हुए और उन्हें पुरुस्कृत करने का निर्णय लिया। जब पुरूस्कार-समारोह में उनकी वे प्रशंसा कर रहे थे तब गोखले जी प्रसन्न होने के बजाय कुछ दुखी दिख रहे थे। शिक्षक के द्वारा पूछने पर उन्होंने ने बताया की वे इस पुरूस्कार के सच्चे हकदार नहीं हैं और अपने उत्तर का पूरा रहस्य बताया, जिसे सुनकर शिक्षक और ज्यादा प्रसन्न हुए - की उन्होंने सब के सामने सक बोलने का साहस किया है। जो सच का आश्रय लेने का साहस करता है उसका अवश्य बहुत कल्याण होता है।
By Vedanta Ashramपू स्वामिनी पूर्णानन्द जी, स्वतंत्र सेनानी श्री गोपाल कृष्ण गोखले जी के जीवन का एक सुन्दर और प्रेरक प्रसंग सुना रही हैं। एक बार जब वे स्कूल में पढ़ते थे और उन सब को उनके शिक्षक ने कुछ होम-वर्क दिया। उनको जितना आता था उन्होंने लिखा, शेष अपने एक मित्र से पूछा और होम-वर्क पूरा कर दिया। शिक्षक उनके उत्तर से प्रसन्न हुए और उन्हें पुरुस्कृत करने का निर्णय लिया। जब पुरूस्कार-समारोह में उनकी वे प्रशंसा कर रहे थे तब गोखले जी प्रसन्न होने के बजाय कुछ दुखी दिख रहे थे। शिक्षक के द्वारा पूछने पर उन्होंने ने बताया की वे इस पुरूस्कार के सच्चे हकदार नहीं हैं और अपने उत्तर का पूरा रहस्य बताया, जिसे सुनकर शिक्षक और ज्यादा प्रसन्न हुए - की उन्होंने सब के सामने सक बोलने का साहस किया है। जो सच का आश्रय लेने का साहस करता है उसका अवश्य बहुत कल्याण होता है।