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पू स्वामिनी समतानन्द जी एक प्रेरक कहानी सुना रही हैं जिसमे वे बता रही हैं की जन्म और मरण दोनों जीवन की अभिन्न अंग हैं अतः हमें जीना भी आये और मृत्यु को भी स्वीकारना सीखें। इस सन्दर्भ में वे हनुमनजी की एक सुन्दर, शिक्षाप्रद और रोचक कथा सुना रही हैं। ध्यान पूर्वक सुने।
By Vedanta Ashramपू स्वामिनी समतानन्द जी एक प्रेरक कहानी सुना रही हैं जिसमे वे बता रही हैं की जन्म और मरण दोनों जीवन की अभिन्न अंग हैं अतः हमें जीना भी आये और मृत्यु को भी स्वीकारना सीखें। इस सन्दर्भ में वे हनुमनजी की एक सुन्दर, शिक्षाप्रद और रोचक कथा सुना रही हैं। ध्यान पूर्वक सुने।