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अपनी पसंद की पत्नी को खोजने के लिए एक व्यक्ति ने एक दुकान खोली और अत्यंत व्यवस्थित तरीके से अपनी पसंद की पत्नी में आवश्यक गुणों की जानकारी मांगी। सुन्दर चाहिए अथवा सामान्य चलेगी - सामने दो दरवाज़े मिलते थे, जिसे खोल के आगे जाना होता था। अंदर पुनः दो दरवाजे - पड़ी लिखी चाहिए अथवा बगैर पड़ी-लिखी चलेगी - फिर दो दरवाज़े। ऐसे अनेकानेक दरवाजे आते गए और लड़के की उत्सुकता बढ़ती गयी। फिर आगे क्या हुआ - यह रोचक और शिक्षाप्रद कहानी आप पू स्वामिनी अमितानन्द जी से सुनिए।
By Vedanta Ashramअपनी पसंद की पत्नी को खोजने के लिए एक व्यक्ति ने एक दुकान खोली और अत्यंत व्यवस्थित तरीके से अपनी पसंद की पत्नी में आवश्यक गुणों की जानकारी मांगी। सुन्दर चाहिए अथवा सामान्य चलेगी - सामने दो दरवाज़े मिलते थे, जिसे खोल के आगे जाना होता था। अंदर पुनः दो दरवाजे - पड़ी लिखी चाहिए अथवा बगैर पड़ी-लिखी चलेगी - फिर दो दरवाज़े। ऐसे अनेकानेक दरवाजे आते गए और लड़के की उत्सुकता बढ़ती गयी। फिर आगे क्या हुआ - यह रोचक और शिक्षाप्रद कहानी आप पू स्वामिनी अमितानन्द जी से सुनिए।