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पढ़ाना और किसी के जीवन को पढ़ लेना एक-दूसरे के पर्याय ही हैं। कुछ भी कहता हो संसार, जो आनंद पढ़ाने में है, वो किसी और काम में कम ही आता है।
इसलिए भी कि एक शिक्षक बनकर आप सब कुछ तो कर सकते हैं - आपसे पढ़कर ही, सीखकर और समझकर ही तो सभी तरह के लोग निकलते हैं - डॉक्टर भी और फौजी भी - मिस्त्री भी और लेखक भी।
हाँ, आपका उनको सही से थामे रखना - कुम्हार के चाक की भांति, बस यही ज़रूरी है।
Happy Teachers' Day!
From the book: कोने का केबिन (Koney Ka Cabin): बस बातें- कविताएं!
बूंद भर उम्मीद समेट कर ले जाता है
By Parveen Sharmaपढ़ाना और किसी के जीवन को पढ़ लेना एक-दूसरे के पर्याय ही हैं। कुछ भी कहता हो संसार, जो आनंद पढ़ाने में है, वो किसी और काम में कम ही आता है।
इसलिए भी कि एक शिक्षक बनकर आप सब कुछ तो कर सकते हैं - आपसे पढ़कर ही, सीखकर और समझकर ही तो सभी तरह के लोग निकलते हैं - डॉक्टर भी और फौजी भी - मिस्त्री भी और लेखक भी।
हाँ, आपका उनको सही से थामे रखना - कुम्हार के चाक की भांति, बस यही ज़रूरी है।
Happy Teachers' Day!
From the book: कोने का केबिन (Koney Ka Cabin): बस बातें- कविताएं!
बूंद भर उम्मीद समेट कर ले जाता है