आप सभी ने लगातार बिजली संकट झेल कर दिखा दिया है कि सहनशीलता के मामले में आपका जवाब नहीं. एक तरफ मंत्री कह रहे हैं कि कोयला और बिजली संकट नहीं है, रिकार्ड मांग पूरी हो रही है. दूसरी तरफ गृहमंत्री के घर कोयला मंत्री, बिजली मंत्री और रेल मंत्री बैठक भी कर रहे हैं.
आज से एक साल पहले कोरोना ने कई परिवारों को तबाह कर दिया था. लखनऊ के पास एक परिवार के तो आठ सदस्य चौबीस दिनों में चल बसे, जो कोरोना से हारे नहीं उनके सामने भी चुनौतियों बनी हुई हैं.
भारत की जनता कब तक और कहां तक सह सकती है, उसकी इस क्षमता को आप कभी कम ना समझें. बर्दाश्त करने के मामले में जनता का जबाव नहीं. अभी तक कोई ऐसा संकट नहीं आया है, जिससे भारत की जनता ने सहकर नहीं दिखाया है.
सलीम गौस की अभिनय यात्रा बहुत शानदार रही. उन्होंने कई महत्वपूर्ण फिल्में कीं. सारांश, कलयुग, चक्र, मंथन, मोहनजोशी हाजिर हो,वेल डन अब्बा, सरदारी बेगम...टीवी सीरियल में भी काम किया उन्होंने.
महंगाई मुद्दा तो है लेकिन महंगाई राजनीतिक मुद्दा नहीं है. इस फर्क को समझ लेने से महंगाई पर बात करना आसान हो जाएगा. यह पहली बार हुआ है जब भारत में एक राजनीतिक वर्ग के रूप में महंगाई के सपोर्टर का उदय हुआ है.
आज भारतीय जीवन बीमा निगम के आईपीओ की घोषणा हो गई. ये 4 मई को खुलेगा. इसका भाव 902 रुपये से 949 रुपए के बीच रखा गया है. कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि एलआईसी ने अपने शेयरों की कीमत ज्यादा तो नहीं रखी है?
युद्ध केवल यूक्रेन में नहीं हो रहा है. एक युद्ध, युद्ध रोकने के नाम पर भी हो रहा है. यूक्रेन तबाही झेल रहा है. लेकिन उसकी तबाही पर कई देश केवल निंदा और बातचीत के प्रयास का हवाला देकर अपनी छवि चमकाने में लगे हुए हैं. दुनियाभर के विदेश मंत्री, राजदूत एक-दूसरे की राजधानियों का दौरा कर रहे हैं.
सोशल मीडिया प्लेट फार्म पर एडिट बटन की स्वतंत्रता देकर वाहवाही लूटने वाली वही कंपनियां अपने पास अलगोरिद्म का अधिकार रखती हैं. जिसकी मदद से किस सूचना या विचार को सब तक पहुंचाना है और ग़ायब कर देना है, इसका खेल खेला जाता है.
भारत में पर्व की कमी नहीं है मगर गर्व की कमी थी. व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी ने कई साल लगाकर पहले बेरोज़गारी और आर्थिक तंगी में डूबे लोगों के अतीत की हीन भावना का बोध कराया फिर उन्हें वर्तमान आर्थिक हीनता से निकालने के लिए गर्व का गेम थमा दिया.