Kalam Bolti Hai

प्रश्न नहीं, परिभाषा बदलनी होगी!


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जिसके विशाल ह्रदय में जज़्बातों का अथाह सागर ! जैसे संपूर्ण सृष्टि की भावनाओं का प्रतिबिंब! उसके व्यक्तित्व की गहराई में कुछ रंग बिखर गए हैं। सदियों से आज भी जूझती है, वह अपने आत्मसम्मान के लिए!
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Kalam Bolti HaiBy Paramjit kaur