सीख - नाम में कुछ नहीं रखा, काम अच्छे होंगे तो नाम खुद-ब-खुद होगा। 'सुखराम' जमानेभर के दुखों का मारा हो सकता है और 'दुखिया' के पास संसारभर के ऐश्वर्य हो सकते हैं। नाम तो आपकी पहचान मात्रा है, शेष सबकुछ तो कर्म ही है। दुष्टकुमार ने जब यह प्रत्यक्ष देखा तो उसका भ्रम टूट गया।