हिंदुस्तान अखबार के संपादकीय पृष्ठ पर श्री गोपाल कृष्ण गांधी द्वारा संपादित...वहां के बाजार वह जगह है जहां लालच पसरा हुआ है मगर उस पर दोष डालकर उसे अलग-थलग कर देना बेतुका है क्योंकि दुनिया के हर शहर हर कस्बे और हर इलाके में हिसाब बाजार है देखा जाए तो वह हम सबके अंदर है।