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ये podcast आप की जिस प्रवृति की जिस प्रवृत्ति में प्रवृत्त होने की प्रवृत्ति नहीं है उस प्रवृत्ति की उस प्रवृत्ति में प्रवृत्ति करवा कर आप की प्रवृत्ति के प्रवृत्त होने की प्रवृत्ति को मिथ्या सिद्ध करने की प्रवृत्ति रखता है।यह बात ध्यान में रखनी पड़ेगी कि ऐसे अंश नित्य धर्म हैं या काम्य ? नित्य कर्म वैयक्तिक होते हुए भी सामाजिक हो जाते हैं । काम्य-धर्म सर्वथा वैयक्तिक होते हैं। समाज के निमित्त से किये कृत्य भी सामाजिक होते हैं। यदि व्यक्ति काम्य- कर्मों द्वारा अपना कल्याण करता है और समाज को हानि पहुँचाता है तो आवश्यक है कि ऐसे कृत्यों और धार्मिक मान्यताओं पर प्रतिबन्ध लगाया जाय । जहाँ तक ज्ञात है, गो-बलि इस्लाम में विहित नहीं है। हो भी तो वह नित्य कर्म के रूप में नहीं । विश्व के किसी धर्म में नित्य-कर्म समष्टि-विरोध में नहीं है और न उसमें परस्पर संघर्ष है । इस प्रकार की ही राज्य-व्यवस्था को हम 'धर्मसापेक्ष पक्षपात-विहीन राज्य' कहते हैं ।
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