आखिर वही हुआ, जिसका डर था. पांच साल तक हाथ-पांव मारने के बाद मोदी सरकार का भी खजाना उतना ही खाली है, जितना पिछली सरकारों का था. एनडीए सरकार ने लगातार खर्च बढ़ाया, जबकि उसकी आमदनी में उस रफ्तार से बढ़ोतरी नहीं हुई. इस गैप को फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा कहते हैं.