वो 90 का दशक था, जिसने भारतवासियों को क्रिकेट में एक नई उम्मीद दी थी. एक नया भरोसा. क्रिकेट से प्यार करने का एक नया कारण दिया था और एक नया नाम भी. 1989 में जिस नाम को सुनकर लोगों के सिर मुड़ने शुरू हुए थे, अब सबका ध्यान सिर्फ उसी नाम पर था. सबकी जुबान पर सिर्फ वही नाम था. शुरू हुआ था एक नया एंथम- सचिन... सचिन...सचिन...