मेरे वतन, मेरे प्यारे वतन
कैसे मनाऊं तुम्हारी आजादी का जश्न?
तुम्हारी मिट्टी लगा लूं ललाट पेया तुम्हारी हवा में गहरी सांस लेकर फुला लूं सीना अपना गर्व सेया फिर तुम्हारे चरण पखारते समंदर से साफ करूं प्लास्टिक का कचरा
जो हम देशभक्तों ने फैलाया है?
मेरे वतन, मेरे प्यारे वतनक्या मैं भी दे दूं जान अपनी तुम्हारी सरहद परया ले लूं जान उनकीजो नहीं करते तुम्हारी जै-जैकार
तुम्हारी मिट्टी से उपजे फल, फूल, अन्न खाकर खुशियां मनाऊंया घर में घुसकर मारूं उन्हें, जिनका खाना मुझे पसंद नहींबाढ़, सूखे से बदहाल हमवतनों के लिए कुछ करूंया मज़हब, जात, निशान पूछूं उन्हें गले लगाने से पहले
मेरे वतन, मेरे प्यारे वतनकैसे मनाऊं तुम्हारी आजा़दी का जश्न
मैं जो दिन भर पिसता हूं गड्ढे-भरी सड़कों पर,धक्के खाता हूं, ट्रेनों, बसों, मेट्रो मेंबिन शिकायत किये करता जाता हूं काम अपना ख़ामोशी-सेक्या इतना काफी नहीं है
हवा बीमार है, पानी के लिए रोज़ होती यहां मार हैअस्पताल से बेहतर श्मशान हैऔर अदालत के बाहर पीढियों की कतार हैफिर भी चुपचाप सुनता रोज़, अच्छा सब समाचार है
मेरे वतन, मेरे प्यारे वतनकैसे मनाऊं तुम्हारी आजा़दी का जश्न मैं
क्या तू सिर्फ नदी, पहाड़, झरनेजंगल, जहाज़, टैंक और हथगोले भर हैतेरी सरहदें सिर्फ ज़मीन पर खींची हैऔर तेरी शान सिर्फ हुक्म़रानों की कमान पर है
तुम्हारे विकास के लिए अगर मुझे मेरे घर से खदेड़ा जाता हैतो तू भी तो थोड़ा बेघर होता होगामेरे खाने, मेरे पहनावे के चलते अगर मेरी जान ली जाती हैतो तू भी तो थोड़ा मरता होगाअगर मेरी आजा़दी को मेरे घर में नज़रबंद किया जाता हैतो तुम्हें भी तो गुलामी का कांटा चुभता होगा
ये मिट्टी तेरी, तो उससे बना मेरा जिस्म किसकाये हवा तेरी, तो मेरी सांसें किसकीये नदियां तेरी, तो मेरे रगों में बहता खून किसकाअगर तू जीत गया, तो मेरी ये हार किसकी हैअगर तू आजा़द है, तो मेरे पैरों में बंधीं ये बेड़ियां किसकी है
मेरे वतन, मेरे प्यारे वतनतुझे तेरी आजा़दी मुबारकलेकिन जबतक मेरी ज़बान पर पहरा हैमेरी सोच, मेरे दि़माग पर झूठ का कोहरा हैमेरी क़लम सियाही बिन सूखी हैऔर तेरे सिर मेरे खून से लतपथ सेहरा हैतू भी आजा़द कहां है?