Pratidin Ek Kavita

Raat Mein Boat Club | Hemant Deolekar


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रात में बोट क्लब । हेमंत देवलेकर


रुकी हुई नावें :

जैसे लहरों ने

बेतरतीबी से उतार फैंकी

अपनी जूतियाँ

और समा गई तलघर में

उनकी नींद पर

मछलियों का पहरा है

बंद है पानी का दरवाज़ा 

चाँद उस पर लटका है

ताले की तरह


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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio