इस कहानी में विदुर राजा धृतराष्ट्र के मंत्री थे लिए जब भगवान कृष्ण पांडव की और से मैत्री प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर आए तो उनके रहने के लिए राजा धृतराष्ट्र का महल चुना गया किन्तु भगवान कृष्ण राजा के महल में नहीं रुके, वह विदुर की कुटिया में रुके लिए भगवान प्यार के भूखे होते हैँ न की माया कर भूखे होते हैँ l