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साधना पञ्चकं : प्रवचन-14 (सूत्र-13)


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साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 14वें प्रवचन में पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ में प्रतिपादित 13वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की "सद्विद्वान उपसर्पयतां" - अर्थात सद्विद्वान के निकट जाईये। किसी भी ज्ञान की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को उस विषय के विद्वान, अर्थात विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए। एक दीप से ही दूसरा दीप जलता है। बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिलता है। अतः जीवन की अगली प्राथमिकता किसी विद्वान के निकट जाने की होती है। सद्विद्वान को हम लोग श्रोत्रिय कहते हैं। उन्हें ब्रह्मनिष्ठ भी होना उचित होता है। ऐसे लोग दुर्लभ होते हैं, लेकिन हर काल में होते जरूर हैं, और हीरे की तरह उनकी तलाश करनी पड़ती है। ये लोग न अपनी ख्याति बताते है न हमारे धन दौलत आदि की उन्हें रुचि होती है - वे अलग ही दुनिया के लोग होते हैं। उन्हें केवल हमारी सेवा, लगन और सच्चाई ही देखनी होती है, बाकी सब उपेक्षणीय होता है। ऐसे महात्मा को ढूढना और उनके निकट जा पाना निश्चित रूप से एक बहुत बड़ी बात होती है। निकट जाने का अर्थ उनके द्वारा स्वीकृत हो पाना। उनके स्नेह का पात्र बन पाना। यह ही १३वां सोपान है।

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Vedanta Ashram PodcastsBy Vedanta Ashram