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साधना पञ्चकं : प्रवचन-25 (सूत्र-24)


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साधना पञ्चकं ज्ञान यज्ञ के 25वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वतीजी महाराज ने ग्रन्थ के 24वें सोपान की भूमिका एवं रहस्य पर प्रकाश डाला। इसमें शंकराचार्यजी कहते हैं की "बुधजनैः वादः परित्यज्यतां"- अर्थात, बुद्धिमान लोगों के साथ विवाद नहीं करना चाहिए। स्वामीजी ने बताया की निदिध्यासन की साधना में प्राथमिकता अपनी ब्रह्म-स्वरूपता के ज्ञान को सहज बनाना होता है। इसमें कुछ समय एकांत में रहकर समाधि का अभ्यास होता है, और फिर जगत के विविध लोगों के बीच में जाकर अपने ज्ञान की निष्ठा दृढ़ करनी होती है। इसके लिए अगर कोई अज्ञानी मिले तो उसके साथ अपने ज्ञान का गर्व नहीं आने देना चाहिए - ये बात पहले कही जा चुकी है। अब कह रहे हैं की जब ज्ञानियों और बुद्धिमानों की संगत मिले तो विनम्रता से उनसे कुछ ज्ञान प्राप्ति की मनोवृत्ति होनी चाहिए। उनसे वाद-विवाद के चक्कर में कभी नहीं पड़ना।

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Vedanta Ashram PodcastsBy Vedanta Ashram