Pratidin Ek Kavita

Safar Ke Saathi | Natasha


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सफ़र के साथी । नताशा


वे मेरे कोई नहीं थे


जिनका रह गया पानी उधार मुझ पर

उन कंधों की स्मृति शेष है


जिन पर मेरी नींद विदा हो गई है

उन पर रह गया उधार


मेरे चुंबन का स्पर्श

बीच रस्ते में जिनसे


बिछड़ जाना पड़ा था

उन चेहरों को निहारना था


जिन्होंने लंबे सफ़र में

मेरी भूख को बाँटा


जिनके संबोधन के सूत्र

ध्वनि में घुल मेरे घर चले आए


मैं कैसे चुकाऊँगी ये कर्ज़

उन अजनबियों के


जो मेरे कोई नहीं थे!


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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio