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नमस्कार।
मैं हूँ Sanju K. Banerjee, लेखक एवं अभिनेता।
आज से हम शुरू कर रहे हैं एक ऐसी बातचीत, जिसमें हम केवल अभिनय की बात नहीं करेंगे, बल्कि अभिनेता, कला, कलाकार और उसकी जिम्मेदारी को समझने की कोशिश करेंगे।
पहला प्रश्न है—
कला क्या है?
कला...
यह शब्द सुनने में बहुत छोटा है, लेकिन अगर हम इसके अर्थ को समझने की कोशिश करें, तो इसके भीतर पूरी मानव सभ्यता दिखाई देती है।
कला केवल अभिनय नहीं है।
कला केवल संगीत नहीं है।
कला केवल नृत्य नहीं है।
कला केवल चित्रकला या साहित्य नहीं है।
कला मनुष्य के भीतर छिपी उस भावना की अभिव्यक्ति है, जिसे हर बार शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
जब मनुष्य अपनी भावना, अपनी सोच, अपना अनुभव और अपनी संवेदना किसी माध्यम से दूसरे मनुष्य तक पहुँचाता है—वहीं से कला जन्म लेती है।
इसीलिए मेरे लिए कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है।
कला समाज का दर्पण है।
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