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राई का पहाड़" बनाने वाली कहावत तो हम सबने सुनी ही होगी. इसका कारण होता है, की हर व्यक्ति का किसी भी विचार को समझने का और उस विचार को समझ कर फिर आगे किसी और व्यक्ति को समझाने का तरीक़ा अलग-अलग होता है | इसके लिए कई कारण होते हैं, जैसे की उस व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में उस विचार को सुनते समय अन्य किस प्रकार के विचार चल रहे हैं, उस व्यक्ति की उस भाषा पर पकड़ कितनी मज़बूत या कमज़ोर है इत्यादि-इत्यादि | यही कारण है की कुछ समय बाद कुछ लोगों के माध्यम से प्रचारित होते-होते वह विचार अपना मुख्य रूप खो देता है और उस मुख्य विचार से भिन्न ही, कोई अलग विचार उस मुख्य विचार के नाम पर प्रसारित होता रहता है. विचारों के इस गलत प्रचार से हमारे धर्म-ग्रन्थ भी अछूते नहीं बचे हैं इसी कारण से प्रेरित हो, अपने धर्म-ग्रंथों को यथार्थ आप सब तक पहुँचाने के उद्देश्य से ही इस पॉडकास्ट का विचार मेरे मन में आया और अब आप सब की सहायता से मैं इसे करने की कोशिश कर रहा हूँ.
By Abhijit Sharmaa5
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राई का पहाड़" बनाने वाली कहावत तो हम सबने सुनी ही होगी. इसका कारण होता है, की हर व्यक्ति का किसी भी विचार को समझने का और उस विचार को समझ कर फिर आगे किसी और व्यक्ति को समझाने का तरीक़ा अलग-अलग होता है | इसके लिए कई कारण होते हैं, जैसे की उस व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में उस विचार को सुनते समय अन्य किस प्रकार के विचार चल रहे हैं, उस व्यक्ति की उस भाषा पर पकड़ कितनी मज़बूत या कमज़ोर है इत्यादि-इत्यादि | यही कारण है की कुछ समय बाद कुछ लोगों के माध्यम से प्रचारित होते-होते वह विचार अपना मुख्य रूप खो देता है और उस मुख्य विचार से भिन्न ही, कोई अलग विचार उस मुख्य विचार के नाम पर प्रसारित होता रहता है. विचारों के इस गलत प्रचार से हमारे धर्म-ग्रन्थ भी अछूते नहीं बचे हैं इसी कारण से प्रेरित हो, अपने धर्म-ग्रंथों को यथार्थ आप सब तक पहुँचाने के उद्देश्य से ही इस पॉडकास्ट का विचार मेरे मन में आया और अब आप सब की सहायता से मैं इसे करने की कोशिश कर रहा हूँ.

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