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जिस समय अर्जुन जैसा धनुर्धर, योद्धा, शूरवीर व्याकुल हुआ एवं क्षत्रियों के कर्म को भुलकर धनुष हाथों से फिसलने लगा और रणभूमि से भागने की सोचने लगा। सोचने की बात है उस वातावरण में "श्री कृष्ण" ने अर्जुन के अति अशांत मन को स्थिर किया, तो यदि शांत और स्थिर मन से गीता के ज्ञान को समझा जाए तो समझ का दायर स्वत: ही बढ़ जाएगा और दृष्टिकोण से परे देखने और समझने की क्षमता भी बढ़ जाएगी । जैसे कि यदि मैं कहूं "अर्जुन" तो क्या वह सिर्फ महाभारत का पात्र है या फिर पांडवों मे तीसरे भाई हैं या फिर कह सकते हैं, कि अर्जुन बलशाली है परंतु भावुक है गुणी भी है और व्यवहारिक भी है, और परम भक्त हैं क्योंकि उन्होंने भगवान की वाणी को चरितार्थ किया नहीं तो भगवान के शब्द भी व्यर्थ हो जाते।
यदि कहे कृष्णा तो क्या वह सिर्फ विष्णु के अवतार हैं इनका नाम जपने से ही कष्ट दूर हो जाएंगे हां हो सकती हैं बिल्कुल सभी के कष्ट दूर हो सकते हैं परंतु चरित्र की परिपूर्णता को समझना बहुत आवश्यक है और ऐसे परिपूर्ण चरित्र, परमात्मा, परमज्ञानी जब भी कोई शरीर धारण करके धरती पर अवतरित होती है तो एक दिव्य रोशनी सरीखे ज्ञान को पीछे छोड़ जाते हैं हमें तो सिर्फ उस पथ पर चलना है शांति और प्रेम खुद-ब-खुद साथ हो जाएगा।
ऐसी परमआनंद, परमात्मा, परमेश्वर कृष्ण को नमन।
रुचि"हर्ष"
By RuchiHarshजिस समय अर्जुन जैसा धनुर्धर, योद्धा, शूरवीर व्याकुल हुआ एवं क्षत्रियों के कर्म को भुलकर धनुष हाथों से फिसलने लगा और रणभूमि से भागने की सोचने लगा। सोचने की बात है उस वातावरण में "श्री कृष्ण" ने अर्जुन के अति अशांत मन को स्थिर किया, तो यदि शांत और स्थिर मन से गीता के ज्ञान को समझा जाए तो समझ का दायर स्वत: ही बढ़ जाएगा और दृष्टिकोण से परे देखने और समझने की क्षमता भी बढ़ जाएगी । जैसे कि यदि मैं कहूं "अर्जुन" तो क्या वह सिर्फ महाभारत का पात्र है या फिर पांडवों मे तीसरे भाई हैं या फिर कह सकते हैं, कि अर्जुन बलशाली है परंतु भावुक है गुणी भी है और व्यवहारिक भी है, और परम भक्त हैं क्योंकि उन्होंने भगवान की वाणी को चरितार्थ किया नहीं तो भगवान के शब्द भी व्यर्थ हो जाते।
यदि कहे कृष्णा तो क्या वह सिर्फ विष्णु के अवतार हैं इनका नाम जपने से ही कष्ट दूर हो जाएंगे हां हो सकती हैं बिल्कुल सभी के कष्ट दूर हो सकते हैं परंतु चरित्र की परिपूर्णता को समझना बहुत आवश्यक है और ऐसे परिपूर्ण चरित्र, परमात्मा, परमज्ञानी जब भी कोई शरीर धारण करके धरती पर अवतरित होती है तो एक दिव्य रोशनी सरीखे ज्ञान को पीछे छोड़ जाते हैं हमें तो सिर्फ उस पथ पर चलना है शांति और प्रेम खुद-ब-खुद साथ हो जाएगा।
ऐसी परमआनंद, परमात्मा, परमेश्वर कृष्ण को नमन।
रुचि"हर्ष"