ये जो बिखरी पड़ी है चारों तरफ
जिसे हम कहते हैं दुनिया
देखा जाए तो वहम है
पर कितना सच्चा ये वहम है
ये एक अधूरी कविता है
'Incomplete lines'….in my word document I have a folder named 'अधूरी कविताएं' as some time I don't have enough time to complete them …
फिर जब फुर्सत मिलती है तो उनको पूरा करती हूं, अधूरी लाईनें…. 'अधूरी कड़ियों' की तरह है
पर क्या ये अधूरी कड़ियां खूबसूरत नहीं है???
ये उन छोटी-छोटी अधूरी इच्छाओं की तरह है
जिन् पर हम शायद ध्यान नहीं देते …
पर यकीन मानिए जब
'छोटे-छोटे एहसास' पूरे होते हैं
तो मन करता है कि एक और
अधूरा एहसास जी ले
ताकि जिंदगी में एहसासों की कड़ियां जुड़ती चली जाए। और छोटे-छोटे एहसासों से ये जिंदगी संवरती चली जाए।
रुचि हर्ष