RuchiHarsh

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RuchiHarsh episodes

  • जीवित वर्तमान....let me live in present
    मैंने सोचा था कि अब नहीं सोचूंगी पर सोच कर रह गई और कर नहीं पाई, मेरी ज़हन ने हर बात फिर दोहराई ,जीवित वर्तमान पर छा गई उसे खा गई, मरे हुए पलों ने जब झूठी आवाज लगाई। सच है ना कि कभी-कभी कुछ कड़वे एहसास इतने गहरे बैठे होते हैं कि हमें लगता है कि बस वही सच है बाकी सब झूठ है, पर माने या ना माने यह भी सच है कि वो उतने भी सच नहीं होते जितना हमारा दिमाग उन्हें दिखाता है।
    4 min
  • एक नाराजगी...can change your inner world and create obstacles to stop the Life's flow ... Be mindful
    एक छोटी सी नाराजगी बहती हुई जिंदगी को बांध देती है और एक छोटे से तालाब में तब्दील कर देती है। सिर्फ एक नाराजगी रिश्तो में, प्यार में ,खुद की जिंदगी में कितना कुछ गलत कर देती है। कभी-कभी लगता है नाराजगी बच्चों की नाराजगी जैसी होनी चाहिए। नाराज तो बच्चे भी होते हैं पर मना लेते हैं या मान जाते हैं पर अपने inner atmosphere को मेला नहीं होने देते।
    3 min
  • Life with perfect speed!
    'Why am I so busy '?
    When everything around me is moving so fast I stop and ask 'is it the world that's busy or is it my mind'?
    सुबह जो शुरू हुई 
    रात तक ना थमी 
    मैंने चारों तरफ देखा 
    एक भागदौड़ थी मची 
    मैं कुछ पल ठहर गई  
    क्योंकि भीतर से थी डरी हुई..
    हम सब के साथ होता है ना ऐसा कभी-कभी
    अगर किसी से बात कर रहे हैं तो दिमाग काम में है… अगर मस्ती कर रहे हैं तो दिमाग काम में है… 
    अगर काम कर रहे हैं तो दिमाग अगले काम में है…
    अगर किसी शादी में से,या दोस्तों से मिल कर आए हैं और काम करना पड़ रहा है तो दिमाग पीछे बीते हुए पलों में है …ऐसा क्यों??
    Be mindful.
    4 min
  • The 'ultimate purpose' and 'Life purpose'
    The ultimate purpose is to find our insights and feel the connection with universe but the 'life purpose' is simply to use the 14 hours of a day and fullfill these hours with earning, learning, connecting and many more....so the question ❓ what should I do with my life ? Is bit not appropriate the question is .... What can I do with my time that is important?.... And that's quite simple to search . जिंदगी को ढूंढ रहे हैं पर जिंदगी सामने ही है बस हाथ पकड़कर चलना है बस हार पकड़कर चलना है।
    4 min
  • Small reasons that make a difference...
    छोटे-छोटे बहाने छोटे-छोटे बयान जो हम पूरा दिन खुद को देते रहते हैं, अपने आप को ही सहमत करने के लिए पर कुछ बहाने अच्छे होते हैं अगर वह हमारी जिंदगी को रफ्तार दे, अगर वह हमारी जिंदगी में कुछ नयापन जोड़ दें हम उन बहानों के जरिए खुद को खुशी दे सके और दूसरों को भी खुशी दे सके छोटे-छोटे बहाने अच्छे होते हैं ,पर उन बहानों से सावधान रहने की जरूरत है जो हमें जिंदगी से पीछे ले जाए जो हमें कहे कि "आज नहीं तो कर लेंगे," "तुम भी तो कर सकती थी" "मैं तो ऐसा ही हूं" ऐसे छोटे-छोटे बहाने जो हमारे और हमारी जिंदगी के बीच में आ जाए उन बहानों से थोड़ा सावधान रहना जरूरी है।
    4 min
  • to go fast is to go slow ...
    Sometimes you have to slow down and stop all your intellectual activity. Activities that make you busy that you don't understand, 'why are you busy'? They put you on a treadmill, making you run relentlessly.
    So slow down for a while. To become mindful and break the behavioural pattern.….
    Listen to your heartbeat simply enjoy your company doing nothing......This will rejuvenate you, realign you with your goal and purpose.
    4 min
  • श्री कृष्ण: ब्रह्मज्ञानी

    श्री कृष्ण:  ब्रह्मज्ञानी


    कृष्ण तो स्वयं मानव शरीर के बंधन में थे.. समझने की आवश्यकता है कि जब वासुदेव के श्री मुख से भगवत ज्ञान प्रकट हुआ, तब उस क्षण, उस वक्त, मानव शरीर में स्थित वह ज्ञान संपूर्ण ब्रह्मांड की आवाज थी। यानी जब कहते हैं वे12 अध्याय में कहते है

    अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।

    निर्ममो निरहङ्‍कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥

    संतुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढ़निश्चयः।

    मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः॥


    अर्थात जो किसी से द्वेष नहीं करता और सब का निस्वार्थ कृपामय मित्र है जो ममता और मिथ्या अहंकार से रहित सुख-दुख की प्राप्ति में समान और क्षमावान है तथा जो हानि लाभ में सदा संतुष्ट रहता है दृढ़ निश्चय सहित भक्ति योग के परायण है और जिसने अपने मन बुद्धि को मुझ में ही अर्पण कर रखा है वह मेरा भक्त मुझे प्रिय है।

     अरे भाई ! आप कहेंगे कि ऐसे कैसे मैं शादी में जाऊं तो सुख होता है किसी मरण क्रिया में जाऊं तो दुख होता है, यह दोनों समान कैसे हो जाएंगे आखिर सांसारिक हैं ,.....हां बात सही है परंतु सुख दुख भाव है feelings  है भाव का आना स्वाभाविक है….. समझने की आवश्यकता है परंतु भाव को पकड़कर नहीं रखना है ।किसी प्रियजन की मृत्यु कष्टकारी है परंतु उसी भाव में रह जाना ठीक नहीं होता, नहीं तो लोग कहते हैं सदमा लग गया ।अब शादी ब्याह में खुशी मिलती है चलो यह भी ठीक है... आने के बाद तक भी हम उसी की चर्चा करते हैं परंतु कब तक....?? इंसानी स्वभाव के भीतर जो भाव हर वक्त उठते हैं वे स्वाभाविक हैं, परंतु पकड़ना नहीं है छोड़ना सीखना है, "नदी जैसा बहना है न कि गड्ढों में ठहरा पानी बनना है" और यह सब तब होगा जब स्थिरता आएगी फिर मन से, शरीर से, बुद्धि से, आत्मा के परमात्मा के होने का व ब्रह्मांड की शुभ शक्तियों का आभास भली-भांति होगा और यह तब होगा....
    जब कुछ क्षण ईश्वर के चरणों में लगाएंगे

    6 min
  • श्रीमद्भगवद्गीता - मोक्ष क्या है?

    संपूर्ण गीता का हर एक श्लोक मंत्र स्वरूप है अब मंत्र है तो

    जपना शुरू नहीं करना है , हां पहले समझेंगे फिर जीवन

    मे उतारेंगे और फिर ऐसे उतारेंगे की वह  वाकई में मंत्र बन

     जाए, जिंदगी के बंद दरवाजों की चाबी बन जाए।

     गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म उपासना और ज्ञान को मोक्ष

     का कारण बताया है इन तीनों में से किसी एक के बिना भी काम नहीं

    चलता। तीनों में से यदि एक भी नहीं है तो दो का

     होना अपूर्ण हो जाता है । बात करते हैं  मोक्ष की 

    "मोक्ष" कोई अलग ग्रह या स्थान नहीं है या नर्क, स्वर्ग से ऊपर कुछ

    है, हां स्वयं जन्म, कर्म, वाणी, आदि के दोष जो हमारे मन

    मस्तिष्क में पलते हैं, हमारे विचारों में ईर्ष्या, द्वेष, कलह

     क्लेश, आदि का कारण बनते हैं उन से ऊपर उठना है

    इनसे ऊपर उठते ही मन से, आत्मा से आनंद की अनुभूति

     होती है यह अनुभूति ही मोक्ष है। मैं फिर से एक बार दोहराती हुँ

    कर्म उपासना और ज्ञान तीनों को साधना है तीनों को ही

     साधना है । 


    रुचि"हर्ष"

    5 min
  • श्री कृष्ण- परम ज्ञानी

    जिस समय अर्जुन जैसा धनुर्धर, योद्धा, शूरवीर व्याकुल हुआ एवं क्षत्रियों के कर्म को भुलकर धनुष हाथों से फिसलने लगा और  रणभूमि से भागने की सोचने लगा। सोचने की बात है उस वातावरण में "श्री कृष्ण" ने अर्जुन के अति अशांत मन को स्थिर किया, तो यदि शांत और स्थिर मन से गीता के ज्ञान को समझा जाए तो समझ का दायर स्वत: ही  बढ़ जाएगा और दृष्टिकोण से  परे देखने और समझने की क्षमता भी बढ़ जाएगी । जैसे कि यदि मैं कहूं "अर्जुन" तो क्या वह सिर्फ महाभारत का पात्र है या फिर पांडवों मे तीसरे भाई हैं या फिर कह सकते हैं, कि अर्जुन बलशाली है परंतु भावुक है गुणी भी है और व्यवहारिक भी है, और परम भक्त हैं क्योंकि उन्होंने भगवान की वाणी को चरितार्थ किया नहीं तो भगवान के शब्द भी व्यर्थ हो जाते।

    यदि कहे कृष्णा तो क्या वह सिर्फ विष्णु के अवतार हैं इनका नाम जपने से ही कष्ट दूर हो जाएंगे हां हो सकती हैं बिल्कुल सभी के कष्ट दूर हो सकते हैं परंतु चरित्र की परिपूर्णता को समझना बहुत आवश्यक है  और  ऐसे परिपूर्ण  चरित्र, परमात्मा, परमज्ञानी  जब भी कोई शरीर धारण करके धरती पर अवतरित होती है तो एक दिव्य रोशनी सरीखे ज्ञान को पीछे छोड़ जाते हैं हमें तो सिर्फ उस पथ पर चलना है शांति और प्रेम खुद-ब-खुद साथ हो जाएगा।

    ऐसी परमआनंद, परमात्मा, परमेश्वर कृष्ण को नमन।

    रुचि"हर्ष"

    5 min
  • वैरागी कृष्ण के सुनहरे रंग....
    पूर्ण आत्मा अर्थात् परमात्मा जब भी परमात्मा धरती पर अवतरित होते हैं तब वह जिस समय, जिस भाव, जिस चरित्र में खड़े होते हैं वह क्षण स्वयं में ही पूर्ण हो जाता है । पूर्ण आत्माएं छोड़ जाती है एक दिव्य रोशनी सरीखा ज्ञान, ऐसा ऐसा ज्ञान का रास्ता पीछे छोड़ जाते हैं जिस पर हमें तो सिर्फ चलना है और रास्ते में शांति और प्रेम खुद-ब-खुद हमें मिल जाएंगे।
    2 min

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भगवान, ईश्वर, खुदा..... नाम चाहे कोई भी हो सब का अर्थ पूर्ण आत्मा से है। पूर्णआत्मा अर्थात परमात्मा... जैसे भगवान कृष्ण जिस समय, जिस भाव, जिस चरित्र में भी खड़े हुए वह क्षण स्वयं में ही पूर्ण हो गया। एक संपूर्ण चरित्र, और जब कोई परम आत्मा कोई शरीर, कोई भी शरीर धारण करके धरती पर अवतरित होती है तो एक दिव्या रोशनी सरीखे ज्ञान का पथ सदा-सदा के लिए पीछे छोड़ जाती है , हमें तो सिर्फ उस पर चलना है और रास्ते में शांति और प्रेम खुद-ब-खुद साथ हो जाएंगे।