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संपूर्ण गीता का हर एक श्लोक मंत्र स्वरूप है अब मंत्र है तो
जपना शुरू नहीं करना है , हां पहले समझेंगे फिर जीवन
मे उतारेंगे और फिर ऐसे उतारेंगे की वह वाकई में मंत्र बन
जाए, जिंदगी के बंद दरवाजों की चाबी बन जाए।
गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म उपासना और ज्ञान को मोक्ष
का कारण बताया है इन तीनों में से किसी एक के बिना भी काम नहीं
चलता। तीनों में से यदि एक भी नहीं है तो दो का
होना अपूर्ण हो जाता है । बात करते हैं मोक्ष की
"मोक्ष" कोई अलग ग्रह या स्थान नहीं है या नर्क, स्वर्ग से ऊपर कुछ
है, हां स्वयं जन्म, कर्म, वाणी, आदि के दोष जो हमारे मन
मस्तिष्क में पलते हैं, हमारे विचारों में ईर्ष्या, द्वेष, कलह
क्लेश, आदि का कारण बनते हैं उन से ऊपर उठना है
इनसे ऊपर उठते ही मन से, आत्मा से आनंद की अनुभूति
होती है यह अनुभूति ही मोक्ष है। मैं फिर से एक बार दोहराती हुँ
कर्म उपासना और ज्ञान तीनों को साधना है तीनों को ही
साधना है ।
रुचि"हर्ष"
By RuchiHarshसंपूर्ण गीता का हर एक श्लोक मंत्र स्वरूप है अब मंत्र है तो
जपना शुरू नहीं करना है , हां पहले समझेंगे फिर जीवन
मे उतारेंगे और फिर ऐसे उतारेंगे की वह वाकई में मंत्र बन
जाए, जिंदगी के बंद दरवाजों की चाबी बन जाए।
गीता में भगवान कृष्ण ने कर्म उपासना और ज्ञान को मोक्ष
का कारण बताया है इन तीनों में से किसी एक के बिना भी काम नहीं
चलता। तीनों में से यदि एक भी नहीं है तो दो का
होना अपूर्ण हो जाता है । बात करते हैं मोक्ष की
"मोक्ष" कोई अलग ग्रह या स्थान नहीं है या नर्क, स्वर्ग से ऊपर कुछ
है, हां स्वयं जन्म, कर्म, वाणी, आदि के दोष जो हमारे मन
मस्तिष्क में पलते हैं, हमारे विचारों में ईर्ष्या, द्वेष, कलह
क्लेश, आदि का कारण बनते हैं उन से ऊपर उठना है
इनसे ऊपर उठते ही मन से, आत्मा से आनंद की अनुभूति
होती है यह अनुभूति ही मोक्ष है। मैं फिर से एक बार दोहराती हुँ
कर्म उपासना और ज्ञान तीनों को साधना है तीनों को ही
साधना है ।
रुचि"हर्ष"