पूर्ण आत्मा अर्थात् परमात्मा जब भी परमात्मा धरती पर अवतरित होते हैं तब वह जिस समय, जिस भाव, जिस चरित्र में खड़े होते हैं वह क्षण स्वयं में ही पूर्ण हो जाता है । पूर्ण आत्माएं छोड़ जाती है एक दिव्य रोशनी सरीखा ज्ञान, ऐसा ऐसा ज्ञान का रास्ता पीछे छोड़ जाते हैं जिस पर हमें तो सिर्फ चलना है और रास्ते में शांति और प्रेम खुद-ब-खुद हमें मिल जाएंगे।