बात बेबाक | Deutsche Welle

सिर्फ नाम का नाम संगठन


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गुटनिरपेक्ष देशों यानी नाम संगठनों की जरूरत बता पाना मुश्किल हो रहा है. जब दुनिया अमेरिका और सोवियतद संघ के दो हिस्सों में बंटी थी, तब तो इसकी अहमियत काफी थी. लेकिन शीत युद्ध खत्म होने के बाद न तो इसने अपने नए लक्ष्य तय किए और न ही किसी मजबूत देश को साथ ले पाया. नतीजा यह हुआ कि 100 से भी ज्यादा देशों के होते हुए भी यह संगठन सिर्फ नाम का रह गया है.
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