सब कुछ तो भारत के अनुकूल था, पिछले तीन विश्व कप मेजबान ने जीते थे. भारत लगातार 10 मैच जीतकर फाइनल मे पहुंचा था, भारत की गेंदबाजी और बल्लेबाजों का डंका बज रहा था. सिर्फ 1 जीत और, फिर 12 साल बाद विश्व कप का खिताब भारत के नाम होता. लेकिन विधि के विधान को कुछ और ही मंजूर था.