REALEducation- Voice Of Students

Study - Health Balance for students E01


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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम सीतेश गुप्ता है।
And This is REALEducation ..voice for students . एक पॉडकास्ट जो completely dedicated है स्टूडेंट्स के लिए।
इस पॉडकास्ट के माध्यम से, मैं स्वयं के स्टूडेंट् लाइफ के अनुभव ,उसके बाद की learning और तमाम महान लोगों के विचारों को पढ़कर एवम समझ कर आपसे साझा करने का प्रयास करूंगा ।जिससे आपके अपने पढ़ाई अथवा पैशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगा।और वो सारी गलतियां जो अमूमन विद्यार्थी अपने विद्यार्थी जीवन में करते है ,एक सीख भी मिलेगी।
इसी कड़ी में आज का पॉडकास्ट उन सभी स्टूडेंट्स के लिए डेडीकेटेड है जो अपने हेल्थ और स्टडी में बैलेंस नही रखते है।हेल्थ से मेरा मतलब सिर्फ physical health नहीं बल्कि mental health भी है।जिसमे focus,stability in life , औरlifestyle भी शामिल है, और यह एक बहुत बड़ा कारण होता है अपने aim अथवा goal को achieve नहीं करने में।
आज का पॉडकास्ट मैं
हमारे प्राचीन ग्रन्थों में वर्णित दो श्लोक के मार्गदर्शन में करूंगा, जो बड़ा ही उत्तम है । ये श्लोक हजारों वर्ष पुराना है, फिर भी आज के student lifestyle के reference में उतना ही सटीक, और उतना ही गंभीर है ।
सुखार्थीः चेत् त्यजेत् विद्याम् विद्यार्थीः चेत् त्यजेत् सुखम् ॥
अर्थात् यदि सुख की कामना है तो विद्या की आशा छोड़ दें और यदि विद्या की कामना है तो सुख का लोभ त्याग दें । यहाँ सुख से मतलब है आलस्य से मिलने वाला झूठा सुख । काम से भागकर, स्वयं को धोखा देने में भी एक प्रकार का आकर्षण है । एक प्रकार का नशा है, जो व्यक्ति को अपाहिज बना डालता है । लेकिन यदि विद्यार्थी पूर्ण रूचि लेकर अध्ययन करे, गुरुजनों की दी हुई शिक्षा को धारण करे तो, विद्या के ग्रहण में जो सुख मिलता है, उसकी अन्यत्र कहीं कल्पना भी नहीं की जा सकती ।विद्यार्थी भी तीन प्रकार के बताए गए हैं : एक, मोर के बच्चे जैसे, जो अंडे से निकलते ही माँ के साथ चल पड़ते हैं, यानि जिनके लिए केवल इशारा ही काफी है । इस तरह के विद्यार्थी बहुत जल्दी सीख लेते हैं । दूसरे, चिड़िया के बच्चे जैसे, जो घोंसले में माँ की प्रतीक्षा करते हैं, और दाना पानी लेने के लिए चोंच खुली रखते हैं । तीसरे, फाख्ता के बच्चे जैसे, जिनके चोंच में माँ को खाना जबरदस्ती ठूँसना पड़ता है । यदि आप मोर के बच्चे न हों तो कम से कम चिड़िया के बच्चे तो अवश्य बन सकते हैं ।
सार रूप से कहा जा सकता है कि विद्यार्थी जीवन एक आदर्श जीवन होता है । इसमें हमें स्वयं को कुछ नियमों में ढालना ही पड़ता है, जो कि वास्तव में इतने आवश्यक नियम हैं कि केवल विद्यार्थी जीवन में ही नहीं, बल्कि पूरे जीवन को ही संतुलित, सुरक्षित और सुगंधित बना देते हैं । विद्यार्थी के लिए महानतम लक्ष्य केवल और केवल ज्ञान होना चाहिए और ज्ञान का लक्ष्य होना चाहिए अपना व मानवता का कल्याण । शिक्षा से रोजगार मिल जाता है, लेकिन शिक्षा को केवल रोजी रोटी का साधन मान बैठना वैसा ही है, जैसे आप किसी तिनके को काटने के लिए कुल्हाड़ा उठा लें । शिक्षा प्राप्त करें, सीखने के लिए, स्वयं को विकसित करने के लिए, और रही रोजगार की बात, तो उसका ख्याल तो ज्ञान स्वयं रख लेगा ।
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REALEducation- Voice Of StudentsBy Sitesh Gupta