अक्सर ,जो दिखता है, वह पूरा सत्य नहीं होता,
क्योंकि ,सत्य विचलित नहीं होता !
ऐसा ही होता आया है,
यह सोच कर , गलत होते देख कर भी ,मुँह मोड़ लेना !
कितना सही है ?
बहाव में बह जाना और प्रश्न करने से कतराना -2
बिना सोचे समझे किसी के साँचे में ढल जाना !-2
आज ज़रूरत है , अपने आप से सवाल करने की ।