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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ११वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी लंकिनी से मिलते हैं तो उसने अपने वास्तविक रूप में आते ही अत्यंत अद्धभुत बातें कहीं। निश्चित रूप से वो ब्रह्मलोक की निवासी व्यक्ति जिसे ब्रह्माजी का सत्संग प्राप्त हुआ था दिख रही थी। उसने हनुमानजी को कहा की आप रामजी को अपने ह्रदय में रख कर लंका में प्रवेश करें और अपना काम करिये। आगे उसे कहा की जो भी रामजी (ईश्वर) को अपने ह्रदय में रखता है उसके लिए असंभव संभव हो जाता है। अकल्पनीय सामर्थ्य प्रकट हो जाते हैं। यह प्रसंग अत्यंत सुन्दर है। फिर हनुमानजी लंका में प्रवेश करते हैं और सीताजी की खोज प्रारम्भ करी। विस्तार से आप यह सब प्रवचन में सुने।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ११वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी लंकिनी से मिलते हैं तो उसने अपने वास्तविक रूप में आते ही अत्यंत अद्धभुत बातें कहीं। निश्चित रूप से वो ब्रह्मलोक की निवासी व्यक्ति जिसे ब्रह्माजी का सत्संग प्राप्त हुआ था दिख रही थी। उसने हनुमानजी को कहा की आप रामजी को अपने ह्रदय में रख कर लंका में प्रवेश करें और अपना काम करिये। आगे उसे कहा की जो भी रामजी (ईश्वर) को अपने ह्रदय में रखता है उसके लिए असंभव संभव हो जाता है। अकल्पनीय सामर्थ्य प्रकट हो जाते हैं। यह प्रसंग अत्यंत सुन्दर है। फिर हनुमानजी लंका में प्रवेश करते हैं और सीताजी की खोज प्रारम्भ करी। विस्तार से आप यह सब प्रवचन में सुने।