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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १२वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने लंका में एक देखा जहाँ रामजी के आयुध अंकित थे तो वे आश्चर्यचकित हुए और प्रसन्न भी। वहां तुलसीवृन्द भी थे। वे देख ही रहे थे की उस समय विभीषणजी जगे और राम-राम की आवाज़ आई। हनुमानजी ने हर पहलु से विचार किया, तर्क से हर पक्ष सोचा और फिर निर्णय किया की यह व्यक्ति निश्चित रूप से एक साधु पुरुष ही है, और इससे हमें आगे बढ़कर अवश्य मिलना चाहिए। उन्होंने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और रामजी का गुण-गान करना प्रारम्भ किया। विभीषणजी ने सुना तो एकदम बहार आए और उन्हें देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए और उनका परिचय पूछा, और हनुमानजी ने अपना परिचय और प्रयोजन बताया। फिर आगे दिव्य वार्तालाप हुआ।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १२वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने लंका में एक देखा जहाँ रामजी के आयुध अंकित थे तो वे आश्चर्यचकित हुए और प्रसन्न भी। वहां तुलसीवृन्द भी थे। वे देख ही रहे थे की उस समय विभीषणजी जगे और राम-राम की आवाज़ आई। हनुमानजी ने हर पहलु से विचार किया, तर्क से हर पक्ष सोचा और फिर निर्णय किया की यह व्यक्ति निश्चित रूप से एक साधु पुरुष ही है, और इससे हमें आगे बढ़कर अवश्य मिलना चाहिए। उन्होंने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और रामजी का गुण-गान करना प्रारम्भ किया। विभीषणजी ने सुना तो एकदम बहार आए और उन्हें देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए और उनका परिचय पूछा, और हनुमानजी ने अपना परिचय और प्रयोजन बताया। फिर आगे दिव्य वार्तालाप हुआ।