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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १४वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी और विभीषणजी के परिचय और मित्रता के उपरान्त विभीषणजी ने सीताजी के बारे में समाचार सुनाया। फिर यह भी बताया की वे अशोक वाटिका नामक उपवन में हैं। उस जगह की विशेष सुरक्षा के बारे में और उन्हें वहां पहुँचने का रहस्य भी बताया। हनुमानजी अशोक वाटिका के लिए निकल गए, और शीघ्र उस स्थान पर पहुँच गए जहाँ सीताजी बैठी हुई थीं। इस प्रवचन में पूज्य गुरूजी ने वहां तक की कथा सुनाई जब रावण सीताजी के पास आता है और उन्हें डरता और धमकाता है। ये पूरी कथा आप स्वतः सुनिए।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १४वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी और विभीषणजी के परिचय और मित्रता के उपरान्त विभीषणजी ने सीताजी के बारे में समाचार सुनाया। फिर यह भी बताया की वे अशोक वाटिका नामक उपवन में हैं। उस जगह की विशेष सुरक्षा के बारे में और उन्हें वहां पहुँचने का रहस्य भी बताया। हनुमानजी अशोक वाटिका के लिए निकल गए, और शीघ्र उस स्थान पर पहुँच गए जहाँ सीताजी बैठी हुई थीं। इस प्रवचन में पूज्य गुरूजी ने वहां तक की कथा सुनाई जब रावण सीताजी के पास आता है और उन्हें डरता और धमकाता है। ये पूरी कथा आप स्वतः सुनिए।