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सुन्दरकाण्ड ज्ञान-यज्ञ - 16


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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १६वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब जब रा सीताजी और उसकी सभी राक्षसियों को एक महीने का समय देकर चला जाता है तो सभी राक्षसियाँ अनेकानेक ढंग से सीता को प्रताडिक करने लगीं।  तब वहां त्रिजटा नामक राक्षसी थी, उसने सभी राक्षसियों को अपने पास बुलाया और अपना रात का ही सपना सुनाया। उसने कहा की हमने देखा की लंका में एक विशाल वानर आया है और उसने लंका जला डाली। रावण को हमने एक गधे के ऊपर नग्न बैठा देखा और वो दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा था, अर्थात मरने जा रहा था।  लंका का राज्य विभीषण जी के पास आ गया है और रामजी ने आदर सहित सीताजी को बुला भेजा है।  यह सब सुनकर सभी राक्षसियाँ सीताजी के पास जाकर क्षमा याचना करती हैं।वण सीताजी और उसकी सभी राक्षसियों को एक महीने का समय देकर चला जाता है तो सभी राक्षसियाँ अनेकानेक ढंग से सीता को प्रताडिक करने लगीं।  तब वहां त्रिजटा नामक राक्षसी थी, उसने सभी राक्षसियों को अपने पास बुलाया और अपना रात का ही सपना सुनाया। उसने कहा की हमने देखा की लंका में एक विशाल वानर आया है और उसने लंका जला डाली। रावण को हमने एक गधे के ऊपर नग्न बैठा देखा और वो दक्षिण दिशा की तरफ जा रहा था, अर्थात मरने जा रहा था।  लंका का राज्य विभीषण जी के पास आ गया है और रामजी ने आदर सहित सीताजी को बुला भेजा है।  यह सब सुनकर सभी राक्षसियाँ सीताजी के पास जाकर क्षमा याचना करती हैं। 

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