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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १९वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सीताजी को यह विश्वास हो गया की हनुमानजी निश्चित रूप से रामजी के भक्त और सेवक हैं तब उन्होंने रामजी और लक्ष्मणजी के समाचार जानने के लिए हनुमानजी से पूछा। हनुमानजी के ये सब उत्तर एवं व्यवहार अत्यंत बुद्धिमत्तापूर्ण और हृदयस्पर्शी हैं - जिन्हे पू स्वामीजी ने भी अत्यंत हृदयस्पर्शी ढंग से सुनाया।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के १९वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सीताजी को यह विश्वास हो गया की हनुमानजी निश्चित रूप से रामजी के भक्त और सेवक हैं तब उन्होंने रामजी और लक्ष्मणजी के समाचार जानने के लिए हनुमानजी से पूछा। हनुमानजी के ये सब उत्तर एवं व्यवहार अत्यंत बुद्धिमत्तापूर्ण और हृदयस्पर्शी हैं - जिन्हे पू स्वामीजी ने भी अत्यंत हृदयस्पर्शी ढंग से सुनाया।