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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 2१वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने रामजी का सन्देश सीताजी को दिया तो वो धन्य हो गयी, हनुमानजी आगे उन्हें थोड़े दिन धीरज रखने को कहते हैं। अब रामजी शीघ्र आएंगे और समस्त राक्षसों का संहार करके सीताजी को आदर के साथ ले जायेंगे। सीताजी अत्यंत प्रसन्न हो गयी और हनुमानजी को अनेकानेक आशीर्वाद दिए। सबसे अच्छा उन्हें तब लगा जब वे बोलीं की रामजी तुम पर बहुत स्नेह बनाये रखें। वे बोलते हैं की हे माता, अब हम कृतकृत्य हो गए। फिर बालवत अपने माताजी से कहते हैं की माताजी बहुत भूख लगी है, आप की आज्ञा हो तो हम कुछ फल खालें। सीताजी ने आज्ञा दी तो वे वानर स्वाभाव का परिचय देते हुए पेड़ पर कूद पड़े।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 2१वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने रामजी का सन्देश सीताजी को दिया तो वो धन्य हो गयी, हनुमानजी आगे उन्हें थोड़े दिन धीरज रखने को कहते हैं। अब रामजी शीघ्र आएंगे और समस्त राक्षसों का संहार करके सीताजी को आदर के साथ ले जायेंगे। सीताजी अत्यंत प्रसन्न हो गयी और हनुमानजी को अनेकानेक आशीर्वाद दिए। सबसे अच्छा उन्हें तब लगा जब वे बोलीं की रामजी तुम पर बहुत स्नेह बनाये रखें। वे बोलते हैं की हे माता, अब हम कृतकृत्य हो गए। फिर बालवत अपने माताजी से कहते हैं की माताजी बहुत भूख लगी है, आप की आज्ञा हो तो हम कुछ फल खालें। सीताजी ने आज्ञा दी तो वे वानर स्वाभाव का परिचय देते हुए पेड़ पर कूद पड़े।