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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के २२वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने सीताजी फल खाने की आज्ञा लेली - तब वे पेड़ पर कूद पड़े और फल खाने के साथ-साथ कुछ पेड़ भी उखाड़ के गिरा दिए। जब वहां के रक्षकों ने रोकना चाहा तो उन्हें मार दिया। कुछ लोग भागे-भागे रावण के पास पहुंचे और समाचार दिया। रावण ने कुछ और राक्षस भेजे। हनुमानजी ने उन्हें भी मार दिया, फिर रावण ने अपने पुत्र अक्षयकुमार को भेजा - वो भी मारा गया। फिर मेघनाद को भेजा जिससे भयंकर युद्ध हुआ। फिर मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र प्रयोग का निश्चय किया।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के २२वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब हनुमानजी ने सीताजी फल खाने की आज्ञा लेली - तब वे पेड़ पर कूद पड़े और फल खाने के साथ-साथ कुछ पेड़ भी उखाड़ के गिरा दिए। जब वहां के रक्षकों ने रोकना चाहा तो उन्हें मार दिया। कुछ लोग भागे-भागे रावण के पास पहुंचे और समाचार दिया। रावण ने कुछ और राक्षस भेजे। हनुमानजी ने उन्हें भी मार दिया, फिर रावण ने अपने पुत्र अक्षयकुमार को भेजा - वो भी मारा गया। फिर मेघनाद को भेजा जिससे भयंकर युद्ध हुआ। फिर मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र प्रयोग का निश्चय किया।