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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 23वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब मेघनाद ने हनुमानजी के ऊपर ब्रह्मास्त्र मारा तो उन्होंने इस दिव्य अस्त्र की महिमा बनाये रखने के लिए स्वेछा से अपने प्रभावित होने का निर्णय लिया और मूर्छित होकर गिर गए। गिरते-गिरते भी उन्होंने अनेकों राक्षसों को मार दिया। भवानीजी थोड़ी आश्चर्यचकित हो गयीं की हनुमानजी कैसे मूर्छित हो गए - तो उन्हें शिवजी स्पष्ट करते हुए बताते हैं की जिसका नाम लेने मात्र से भाव-बंधन समाप्त हो जाता है, ऐसे रामी से सेवक को कौन बन्द्ग सकता है, वे तो स्वेच्छा से मूर्छित हो गए थे। लेकिन मूर्छित होने के बाद भी मेघनाद उनके पास तब तक नहीं गया जब तक उसने उन्हें नागपाश में बांध नहीं दिया। फिर उन्हें रावण की सभा में ले जाया गया।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 23वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब मेघनाद ने हनुमानजी के ऊपर ब्रह्मास्त्र मारा तो उन्होंने इस दिव्य अस्त्र की महिमा बनाये रखने के लिए स्वेछा से अपने प्रभावित होने का निर्णय लिया और मूर्छित होकर गिर गए। गिरते-गिरते भी उन्होंने अनेकों राक्षसों को मार दिया। भवानीजी थोड़ी आश्चर्यचकित हो गयीं की हनुमानजी कैसे मूर्छित हो गए - तो उन्हें शिवजी स्पष्ट करते हुए बताते हैं की जिसका नाम लेने मात्र से भाव-बंधन समाप्त हो जाता है, ऐसे रामी से सेवक को कौन बन्द्ग सकता है, वे तो स्वेच्छा से मूर्छित हो गए थे। लेकिन मूर्छित होने के बाद भी मेघनाद उनके पास तब तक नहीं गया जब तक उसने उन्हें नागपाश में बांध नहीं दिया। फिर उन्हें रावण की सभा में ले जाया गया।