
Sign up to save your podcasts
Or


सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 27वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी ने रावण को भक्ति, विवेक, वेत्राज्ञा और नीति से भरी बातें समझाई, वे सब बातें उसके अपने, उसके परिवार और पूरे राज्य के हित में थी। लेकिन रावण केवल अभिमानी ही बल्कि महा-अभिमानी था। वो कस के हँसा और उपहास करते हुए बोला की आज हमें एक बन्दर गुरु मिला है। अपने सिपाहियों को उसने हनुमानजी को मारने की आज्ञा दी, जिसे सुनते ही सब उन्हें मारने दौड़े। तभी सभा में विभीषण जी का आगमन हुआ। उन्होंने ने आदर सहित रावण का सत्कार किया और पूरी स्थिति समझने के बाद बोले की महाराज, किसी दूत को मारना उचित नहीं होता है, हमारा सुझाव है की आप कोई और दंड इसे दीजिए। जब बाकी सबने भी इस सुझाव के लिए अपनी सहमति दी - तब रावण ने हनुमानजी की पूँछ में आग लगाने की आज्ञा दी।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 27वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी ने रावण को भक्ति, विवेक, वेत्राज्ञा और नीति से भरी बातें समझाई, वे सब बातें उसके अपने, उसके परिवार और पूरे राज्य के हित में थी। लेकिन रावण केवल अभिमानी ही बल्कि महा-अभिमानी था। वो कस के हँसा और उपहास करते हुए बोला की आज हमें एक बन्दर गुरु मिला है। अपने सिपाहियों को उसने हनुमानजी को मारने की आज्ञा दी, जिसे सुनते ही सब उन्हें मारने दौड़े। तभी सभा में विभीषण जी का आगमन हुआ। उन्होंने ने आदर सहित रावण का सत्कार किया और पूरी स्थिति समझने के बाद बोले की महाराज, किसी दूत को मारना उचित नहीं होता है, हमारा सुझाव है की आप कोई और दंड इसे दीजिए। जब बाकी सबने भी इस सुझाव के लिए अपनी सहमति दी - तब रावण ने हनुमानजी की पूँछ में आग लगाने की आज्ञा दी।