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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 28वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण ने हनुमानजी की पूँछ में आग लगाने की आज्ञा दी तब उनके सब सहयोगी लोगों ने पूँछ में आग लगाने के लिए जल्दी-जल्दी कपडे और तेल की व्यवस्था करी। पूँछ में कपड़ा बांधना प्रारंभ हुआ, और हनुमानजी मजा लेते हुए अपनी पूँछ बड़ी करते गए। किसी तरह से कपड़ा बंधा गया और फिर हनुमानजी को नगर में घुमाया गया। बाद में पूँछ में आग लगा दी गयी। उस समय हनुमानजी ने अपना रूप छोटा करके बंधन से निकल गए एंड घरों की छत पर चढ़ कर सब तरफ आग लगाने लगे - केवल विभीषण का घर छूटा। फिर समुद्र में कूदकर आग बुझाकर सीताजी के पास पुनः छोटा रूप धारण करके पहुँच गए।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 28वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण ने हनुमानजी की पूँछ में आग लगाने की आज्ञा दी तब उनके सब सहयोगी लोगों ने पूँछ में आग लगाने के लिए जल्दी-जल्दी कपडे और तेल की व्यवस्था करी। पूँछ में कपड़ा बांधना प्रारंभ हुआ, और हनुमानजी मजा लेते हुए अपनी पूँछ बड़ी करते गए। किसी तरह से कपड़ा बंधा गया और फिर हनुमानजी को नगर में घुमाया गया। बाद में पूँछ में आग लगा दी गयी। उस समय हनुमानजी ने अपना रूप छोटा करके बंधन से निकल गए एंड घरों की छत पर चढ़ कर सब तरफ आग लगाने लगे - केवल विभीषण का घर छूटा। फिर समुद्र में कूदकर आग बुझाकर सीताजी के पास पुनः छोटा रूप धारण करके पहुँच गए।