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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 29वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी लंका दहन के बाद समुद्र में अपनी पूँछ बुझा कर पुनः छोटा रूप धारण करके सीताजी के पास आये और उन्हें प्रणाम करके बोले की हे माता, आप भी हमें रामजी के लिए कोई चिन्ह दीजिये जैसे प्रभु ने दिया था। तब सीता जी ने अपनी चूड़ामणि उतार कर उन्हें दी और साथ-साथ कुछ विशेष सन्देश भी दिया। उसके बाद हनुमानजी ने लंका से प्रस्थान किया।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 29वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी लंका दहन के बाद समुद्र में अपनी पूँछ बुझा कर पुनः छोटा रूप धारण करके सीताजी के पास आये और उन्हें प्रणाम करके बोले की हे माता, आप भी हमें रामजी के लिए कोई चिन्ह दीजिये जैसे प्रभु ने दिया था। तब सीता जी ने अपनी चूड़ामणि उतार कर उन्हें दी और साथ-साथ कुछ विशेष सन्देश भी दिया। उसके बाद हनुमानजी ने लंका से प्रस्थान किया।