सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 30वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि हनुमानजी सीता के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेकर, एवं सीता जी के द्वारा दिया हुआ चिन्ह और सन्देश लेकर, जोर से गर्जना करके लंका से वापस निकल गए। वे वहां पहुँच कर वानरों से मिले और सब समाचार बताया। सब बहुत ही खुश हुए जैसे उनको नया जीवन मिल गया हो। सब फिर सुग्रीव के पास गए। नगर के बाहर सुग्रीव का एक सुन्दर मधुवन था। युवराज अंगद की आज्ञा से सबने खूब फल खाये। मड़ुवन में फल खाने का समाचार सुन कर सुग्रीव समझ गए की वे सब सफलता पूर्वक लौट रहे हैं। उन्हें भी सब समाचार मिला, और फिर सब लोग रामजी के पास गए।