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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 31वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सुग्रीव एवं जाम्बवानजी समस्त वानर की मंडली एवं हनुमानजी के साथ रामजी के पास पहुँचे तब कुशल-क्षेम के बाद जाम्बवानजी ने ने रामजी की वंदना करके हनुमानजी की पूरी लंका-लीला बताना प्रारम्भ किया - और कहा की प्रभु हनुमानजी ने जो किया है वो तो हज़ार मुख से भी हम बता नहीं सकते। तो भी उन्होंने सब बताया। फिर रामजी ने हनुमानजी से सीताजी का हाल-चाल पूछा, और यह जानना चाहा की हमें बताओ की सीता जी अपने प्राणों के रक्षा कैसे करती हैं। इसका अत्यंत सूंदर उत्तर हनुमानजी ने दिया - जो आप खुद इस सुन्दर से प्रवचन में सुनिए।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 31वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सुग्रीव एवं जाम्बवानजी समस्त वानर की मंडली एवं हनुमानजी के साथ रामजी के पास पहुँचे तब कुशल-क्षेम के बाद जाम्बवानजी ने ने रामजी की वंदना करके हनुमानजी की पूरी लंका-लीला बताना प्रारम्भ किया - और कहा की प्रभु हनुमानजी ने जो किया है वो तो हज़ार मुख से भी हम बता नहीं सकते। तो भी उन्होंने सब बताया। फिर रामजी ने हनुमानजी से सीताजी का हाल-चाल पूछा, और यह जानना चाहा की हमें बताओ की सीता जी अपने प्राणों के रक्षा कैसे करती हैं। इसका अत्यंत सूंदर उत्तर हनुमानजी ने दिया - जो आप खुद इस सुन्दर से प्रवचन में सुनिए।