
Sign up to save your podcasts
Or


सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 35वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सब सुग्रीव की आज्ञा और आव्हान पर वानर और भालू गण इकट्ठा हो गए तब भगवान् राम ने सबको अत्यंत कृपा की नज़रों से देखा जिससे सब अत्यंत प्रेरित और उत्साही हो गए, और फिर गरजते हुए उत्साह से युक्त रामजी की सेना ने कूच किया। उस समय का दृश्य और वर्णन अत्यंत रोमांचकारी था, जिसका अत्यंत काव्यात्मक वर्णन किया गया है। और कुछ की समय में वे सब समुद्र के तट पर पहुँच जाते हैं।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 35वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब सब सुग्रीव की आज्ञा और आव्हान पर वानर और भालू गण इकट्ठा हो गए तब भगवान् राम ने सबको अत्यंत कृपा की नज़रों से देखा जिससे सब अत्यंत प्रेरित और उत्साही हो गए, और फिर गरजते हुए उत्साह से युक्त रामजी की सेना ने कूच किया। उस समय का दृश्य और वर्णन अत्यंत रोमांचकारी था, जिसका अत्यंत काव्यात्मक वर्णन किया गया है। और कुछ की समय में वे सब समुद्र के तट पर पहुँच जाते हैं।