
Sign up to save your podcasts
Or


सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 36वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी की पूरी सेना सागर के पास पहुँच गयी, तब सब वानरों और भालुओं ने फल आदि खाये और विश्राम किया। दूसरी तरफ लंका की स्थिति का वर्णन का गोस्वामीजी बताते हैं की वहां की समस्त प्रजा बहुत ही डरी हुई थी। हनुमानजी का लंका में विनाश घर-घर में चर्चा का विषय था। सब बोल रहे थे की जिसका एक वानर इतना कुछ कर सकता है, जब वे स्वयं यहाँ आ जायेंगे तब क्या होगा। ये बात मंदोदरी तक भी पहुंची, और उन्होंने रावण को समझने का और प्रयास किया। एक अच्छी पत्नी के धर्म का पालन करती हुई उसने रावण को समझाया की हे नाथ, ये सीता हमारे कुल और राज्य के लिए काल बनकर आयी है। ये राम सामान्य व्यक्ति नहीं दिखाई देते हैं। हमारी बात मान लीजिये और सीता को अपने सचिवों के द्वारा वापस भिजवा दीजिये।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 36वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी की पूरी सेना सागर के पास पहुँच गयी, तब सब वानरों और भालुओं ने फल आदि खाये और विश्राम किया। दूसरी तरफ लंका की स्थिति का वर्णन का गोस्वामीजी बताते हैं की वहां की समस्त प्रजा बहुत ही डरी हुई थी। हनुमानजी का लंका में विनाश घर-घर में चर्चा का विषय था। सब बोल रहे थे की जिसका एक वानर इतना कुछ कर सकता है, जब वे स्वयं यहाँ आ जायेंगे तब क्या होगा। ये बात मंदोदरी तक भी पहुंची, और उन्होंने रावण को समझने का और प्रयास किया। एक अच्छी पत्नी के धर्म का पालन करती हुई उसने रावण को समझाया की हे नाथ, ये सीता हमारे कुल और राज्य के लिए काल बनकर आयी है। ये राम सामान्य व्यक्ति नहीं दिखाई देते हैं। हमारी बात मान लीजिये और सीता को अपने सचिवों के द्वारा वापस भिजवा दीजिये।