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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 39वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण ने विभीषण से उनकी राय मांगी तो उन्होंने अत्यंत आदर और सम्मान पूर्वक रावण को बताया की काम आदि से दूर रहते हुए सीताजी को वापस भिजवा कर रामजी की शरण में जाना ही कल्याणकारी है। वे कहते हैं की रामजी सामान्य नारों के राजा नहीं हैं, वे साक्षात् ईश्वर हैं। यह सब बातें हमें अभी पुलस्त्य ऋषि जी (रावण के दादाजी) ने अपने शिष्य के द्वारा संदेशा भिजवाया है।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 39वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रावण ने विभीषण से उनकी राय मांगी तो उन्होंने अत्यंत आदर और सम्मान पूर्वक रावण को बताया की काम आदि से दूर रहते हुए सीताजी को वापस भिजवा कर रामजी की शरण में जाना ही कल्याणकारी है। वे कहते हैं की रामजी सामान्य नारों के राजा नहीं हैं, वे साक्षात् ईश्वर हैं। यह सब बातें हमें अभी पुलस्त्य ऋषि जी (रावण के दादाजी) ने अपने शिष्य के द्वारा संदेशा भिजवाया है।