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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन इन्दौर स्थित पूज्य पाद श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में प्रवेश किया, और किष्किन्धाकाण्ड के अंतिम प्रसंग से सुंदरकांड की संगती जोड़ी। सम्पति की कहानी और फिर सभी वनरादि ने समुद्र पार कर सीता माता से मिलकर उनका समाचार लाने का निश्चय किया। फिर बात आयी की कौन समुद्र के उस पार जाकर यह कार्य करेगा। इस प्रसंग के माध्यम से अंगद चरित्र / जाम्बवान चरित्र और फिर हनुमानजी का चरित्र - इन सबका चिंतन हुआ। विशेष रूप से जाम्बवान जी का विशेष चिंतन और स्तुति की। यह सब अत्यंत मनोहर कथा है - ध्यान पूर्वक सुने।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन इन्दौर स्थित पूज्य पाद श्री स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में प्रवेश किया, और किष्किन्धाकाण्ड के अंतिम प्रसंग से सुंदरकांड की संगती जोड़ी। सम्पति की कहानी और फिर सभी वनरादि ने समुद्र पार कर सीता माता से मिलकर उनका समाचार लाने का निश्चय किया। फिर बात आयी की कौन समुद्र के उस पार जाकर यह कार्य करेगा। इस प्रसंग के माध्यम से अंगद चरित्र / जाम्बवान चरित्र और फिर हनुमानजी का चरित्र - इन सबका चिंतन हुआ। विशेष रूप से जाम्बवान जी का विशेष चिंतन और स्तुति की। यह सब अत्यंत मनोहर कथा है - ध्यान पूर्वक सुने।