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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 42वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषणजी को रावण ने प्रताड़ित और अपमानित करके लंका से निकल जाने को कहा तब वे आकाश मार्ग से ऊपर उठे और पुनः बोले के रामजी के शरण में जाओ, अन्यथा ये सभा काल के वश में हो गयी है। शिवजी कहते हैं की जहाँ पर एक साधु व्यक्ति की अवज्ञा होती है वहां सब प्रकार के कल्याण समाप्त हो जाते हैं। विभीषणजी रामजी के चरण कमल के संभावित दर्शन से अत्यंत हर्षित थे। आज हम उन चरम कमल के दर्शन करेंगे जिन्होंने अहिल्या का उद्धार किया था, जिन्होंने पूरे दण्डकारण्य को पावन कर दिया है, जो चरण कमल सीताजी और शिवजी सदैव अपने ह्रदय में रखते हैं।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 42वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषणजी को रावण ने प्रताड़ित और अपमानित करके लंका से निकल जाने को कहा तब वे आकाश मार्ग से ऊपर उठे और पुनः बोले के रामजी के शरण में जाओ, अन्यथा ये सभा काल के वश में हो गयी है। शिवजी कहते हैं की जहाँ पर एक साधु व्यक्ति की अवज्ञा होती है वहां सब प्रकार के कल्याण समाप्त हो जाते हैं। विभीषणजी रामजी के चरण कमल के संभावित दर्शन से अत्यंत हर्षित थे। आज हम उन चरम कमल के दर्शन करेंगे जिन्होंने अहिल्या का उद्धार किया था, जिन्होंने पूरे दण्डकारण्य को पावन कर दिया है, जो चरण कमल सीताजी और शिवजी सदैव अपने ह्रदय में रखते हैं।