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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 45वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी ने विभीषण को लाने की लिए कहा तो सब अत्यंत प्रसन्न होकर उन्हें लाने के लिए गए और बहुत आदर के साथ लाये। विभीषणजी ने दूर से रामजी और लक्ष्मणजी को देखा, वे स्तब्ध होकर एक क्षण के लिए खड़े हो गए। उन्होंने जो देखा उसका बहुत ही सुन्दर और विशद वर्णन है। मन में हर्ष और प्रफुल्लता थी। वे पास आये और उन्होंने पूरी सच्चाई से अपना परिचय दिया और उनसे निवेदन किया की वे उनकी रक्षा करें। मैं आपकी शरण में हूँ।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 45वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब रामजी ने विभीषण को लाने की लिए कहा तो सब अत्यंत प्रसन्न होकर उन्हें लाने के लिए गए और बहुत आदर के साथ लाये। विभीषणजी ने दूर से रामजी और लक्ष्मणजी को देखा, वे स्तब्ध होकर एक क्षण के लिए खड़े हो गए। उन्होंने जो देखा उसका बहुत ही सुन्दर और विशद वर्णन है। मन में हर्ष और प्रफुल्लता थी। वे पास आये और उन्होंने पूरी सच्चाई से अपना परिचय दिया और उनसे निवेदन किया की वे उनकी रक्षा करें। मैं आपकी शरण में हूँ।