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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 46वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषणजी रामजी के पास लाये गए, तब दूर से ही जब उन्होंने रामजी और लक्ष्मणजी को देखा तो वे स्तब्ध होकर एक क्षण उन्हें देखते ही रह गए। फिर संभल कर अपना परिचय दिया और दंडवत प्रणाम किया। रामजी ने उन्हें अपने हाथों से उठाया और अपने पास बैठाया और उन्हें लंकेश कहते हुए उनका कुशल पूछा। विभीषणजी ने अत्यंत भक्ति और विनम्रता के साथ बोलै की प्रभु अब आपके चरण कमलों का दर्शन कर लिया है - अब तो सब मंगल ही है।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 46वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में आगे बताया कि जब विभीषणजी रामजी के पास लाये गए, तब दूर से ही जब उन्होंने रामजी और लक्ष्मणजी को देखा तो वे स्तब्ध होकर एक क्षण उन्हें देखते ही रह गए। फिर संभल कर अपना परिचय दिया और दंडवत प्रणाम किया। रामजी ने उन्हें अपने हाथों से उठाया और अपने पास बैठाया और उन्हें लंकेश कहते हुए उनका कुशल पूछा। विभीषणजी ने अत्यंत भक्ति और विनम्रता के साथ बोलै की प्रभु अब आपके चरण कमलों का दर्शन कर लिया है - अब तो सब मंगल ही है।