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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 47वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब प्रभु श्री राम ने विभीषणजी से उनका कुशल पूँछा तब वे बोले की 'भगवन, जब तक किसी के मन में अनेकों दुष्टों का वास है तब तक लोभ, मोह, आदि ह्रदय में बसते हैं और जब ईश्वर भक्ति रुपी सूर्य उगता है तभी ये सब विकार समाप्त हो जाते हैं और मन में ये सभी विकार भाग जाते हैं। हमें तो आप की कृपा से उन चरणों के दर्शन का सौभाय मिल गया है जिन चरणों को ब्रह्माजी और शिकजी अपने ह्रदय में रखते हैं - अतः हमारा तो सब कुशल-मंगल है'।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 47वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब प्रभु श्री राम ने विभीषणजी से उनका कुशल पूँछा तब वे बोले की 'भगवन, जब तक किसी के मन में अनेकों दुष्टों का वास है तब तक लोभ, मोह, आदि ह्रदय में बसते हैं और जब ईश्वर भक्ति रुपी सूर्य उगता है तभी ये सब विकार समाप्त हो जाते हैं और मन में ये सभी विकार भाग जाते हैं। हमें तो आप की कृपा से उन चरणों के दर्शन का सौभाय मिल गया है जिन चरणों को ब्रह्माजी और शिकजी अपने ह्रदय में रखते हैं - अतः हमारा तो सब कुशल-मंगल है'।